August 28, 2017

ઉના પ્રતિરોધના મહાનાયક હિરાભાઈ ચાવડાની મુલાકાત

By Raju Solanki  || 27 Aug 2017


જેમના જીવન સંઘર્ષ આગળ ધીરુભાઈ અંબાણીનો સંઘર્ષ તો પિકનિક જેવો છે

ઉના-દમન પછી સુરેન્દ્રનગરમાં મરેલા ઢોર કલેક્ટર કચેરી આગળ ઠાલવીને સમગ્ર દેશના દલિત આંદોલનમાં અભૂતપૂર્વ, ઐતિહાસિક અને નિર્ણાયક ક્રાન્તિની શરૂઆત કરનારા હિરાભાઈ ચાવડાને આજે મળવાનું મને સૌભાગ્ય પ્રાપ્ત થયું. તેમની જીવન કથની સાંભળીને મને લાગ્યું કે તેમની આગળ ધીરૂભાઈ અંબાણી જેવા ઉદ્યોગ સાહસિકોના કહેવાતા જીવન સંઘર્ષો તો રીવરફ્રન્ટની પાળે બેસીને માણેલી પિકનિકો જેવા છે.

”હિરાભાઈ કેટલું ભણ્યા?”, તો કહે છે, ”સરકારી નિશાળમાં ગયો, પણ એકેય આંકડો ના આવડ્યો. દસ વર્ષની ઉંમરથી માંડ માંડ સાયકલ ચલાવતો, વારંવાર પડી જતો, તોય ચામડાની ફેરી કરતો, જે સમયે હાડકાના મણે (20 કિલોના) રૂપિયા પાંચ મળતા હતા જેના હવે 300 રૂપિયા થયા. ચામડાનો ભાવ સાઇઠ ગણો થયો, પરંતુ નફાનું માર્જીન ઘટી ગયું.”

“આજે હાડકામાંથી બૉન એશ બને, જે સીરામિક ઉદ્યોગમાં વપરાય. સરકાર સીરામિક ઉદ્યોગમાં પટેલોને કરોડોની લોનો આપે છે, પરંતુ ચમારને પાંચીયોય આપતી નથી. મારું વરસનું ટર્ન ઓવર લાખો રૂપિયાનું છે, તોય બેન્ક મને કરન્ટ ક્રેટિડ ફેસિલિટી આપતી નથી.”

મોદીની વાત નીકળી તો હિરાભાઈએ કહ્યું કે, “મોદી દુનિયાભરમાં ફરીને કહે છે કે ભારતે સ્લોટર હાઉસ બંધ કર્યા છે. અમારા ચામડાના વેપારીઓ કહે છે કે દુનિયાના બજારોમાં હવે ભારતના ચામડાના સોદા હવે થતા જ નથી. આમાં સૌથી મોટું નુકસાન દલિતોને થયું છે.” મોદી સરકાર દલિતોની કમર ભાંગી રહી છે, પરંતુ દેશના મોટા સ્લોટર હાઉસના માલિકો બ્રાહ્મણો છે અને ચામડાના અગ્રણી નિકાસકારો પણ બ્રાહ્મણો છે. બોલો હવે બ્રાહ્મણવાદ સે આઝાદી.

“આપણી સૌથી મોટી સમસ્યા શું છે?,” તો હિરાભાઈએ કહ્યું કે આપણા વિસ્તારોમાં સરકારે અને પોલિસે દારૂના અડ્ડાની બેફામ છૂટ આપી છે. તેઓ દલિતોને દારૂ પીવડાવીને ખતમ કરી રહ્યા છે. યુવાનોએ દારૂ છોડવો જોઇએ, નહીંતર આપણે બરબાદ થઈ જઈશું.

(દલિત એજન્ડા સમિતિના સભ્યો વિજય જાદવ, વિશાલ સોનારા તથા પ્રજ્ઞેશ લેઉવા સાથે સુરેન્દ્રનગરમાં હિરાભાઈના ઘરે)



August 27, 2017

તરણેતર ના મેળા મા "એક ગાય નુ દર્દ"

By Vishal Sonara || 27 Aug 2017 at 10:29

આપણા ગુજરાત ના પ્રખ્યાત તરણેતર ના મેળા મા આ વખતે એક ગુજરાત ના ગૌ ચાહકો માટે આયનો દેખાડતો એક સ્ટોલ જો કદાચ કોઇ મેળા મા ગયુ હોય તો એ જોયો હશે. 

આ સ્ટોલ ની ખાસીયત હતી "એક ગાય નુ દર્દ"

જ્યારે નજર સામે ગાય કચરો ખાતી હોય ત્યારે કચરા મા આપણે જ નાખેલુ પ્લાસ્ટીક પણ એના પેટ મા જતુ હોય એ જો દેખાતુ ન હોય તો કયા મોઢે ગાય ને પુજનીય માનવાનો ઢોંગ થઈ રહ્યો છે?

ગાયો ને ચરવા માટે ની ગૌચર ની સુવીધા કાયદા દ્વારા આપવામા આવે છે પણ એ ગૌચર અત્યારે ક્યા છે એ પ્રશ્ન કોઇ પણ ગૌસેવા વાળા કે ગાય પ્રેમી જનતા એ ઉઠાવ્યો નથી. 

પણ જો ગાય ના મુદ્દા પર મુસલમાન કે દલિત પર અત્યાચાર કરવાનો મોકો મળે તો કહેવાતા ગૌરક્ષકો એક પણ મુદ્દો છોડવા તૈયાર નથી. 

આ કહેવાતા ગૌરક્ષકો અને ગાય પ્રેમી જનતા ને સાચુ ચીત્ર દેખાડવાના એક પ્રયાસ સ્વરુપે આપણા કર્મનીષ્ઠ વ્યક્તિ નટુ ભાઈ પરમાર અને એમની ટીમ દ્વારા ગુજરાત ના ઐતીહાસીક કહેવાતા એવા તરણેતર ના મેળા મા ફક્ત ગાય માટે જ એક સ્ટોલ નાખવામા આવ્યો હતો.

જેમા ફોટા મા જોઇ શકાય છે એમ એક ગાય ની પ્રતીકૃતી રાખવામા આવેલ હતી અને એના પેટ મા મૃત ગાય ના પેટ માથી નીકળેલ પ્લાસ્ટીક ની થેલીઓ અને પ્લાસ્ટીક નો કચરો કે જે ગાયો માટે મરણતોલ બની રહે છે. એ રાખવામા આવેલ. તથા એ જ પ્લાસ્ટીક ને ડીસ્પ્લે મા લોકો જોઇ શકે એ માટે રાખવામા આવેલ હતુ.

અમુક કહેવાતા ગૌસેવકો મોઢુ મચકોડી ને કદાચ એ સ્ટોલ આગળ થી પસાર થઈ શકે છે પણ જે લોકો ને સાચે જ ગાય ની પડી છે એ લોકો માટે આ એક વિચારવા માટે નો તણખો પુરો પાડે એવુ પ્રદર્શન નટુ ભાઈ અને એમની ટીમ દ્વારા કરવામા આવેલુ હતુ. 




पढ़िए, राम रहीम केस की पीड़िता साध्वी की चिट्ठी, जिससे शिकंजे में फंसा बलात्कारी बाबा

By Vishal Sonara || 27 Aug 2017 at 09:13

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो महिलाओं से बलात्कार के आरोप में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया है। 
रेप पीड़िता साध्वी की प्रधानमंत्री को लिखी गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था। इसके बाद 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है। पीडीत साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:


सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी
श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें।
 श्रीमान जी,
यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं। मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं। हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है। साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा यौनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है। मैं बीए पास लड़की हूं। मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी।
साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है। मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी। यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है। गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं। हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है। बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है। मैं यह सब देखकर हैरान रह गई। मुझे चक्कर आने लगे। मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई। यह क्या हो रहा है। महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।
 
महाराज ने टीवी को बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है। मेरा यह पहला दिन था। महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं। तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था। तो अब ये तन-मन हमारा है। मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं। जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा -
1 - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे। फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है।
2 - यह है कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं। तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्र्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं। वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते। यह तुमको अच्छे से पता है।
3 - यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है। हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं। राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे। हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे। सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे। सबूत भी नहीं छोड़ेंगे। यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है। ना ही कोई सबूत बकाया है। जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे।
इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है। आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है। डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं। जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं मगर घरवालों के अंधविश्र्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं।
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है। दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है। मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है। तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं। सतगुरु का सिमरण किया कर। मैं मजबूर हूं। यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है। यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं। घरवालों को टेलीफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं।
घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है। यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो। पिछले दिनों बठिंडा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने पर्दाफाश किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा। जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है। जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है। जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही।
एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है। उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है। संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए। घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा। इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं। जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं।
अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी। क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं। जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं। अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं। पूरा विश्र्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं। हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं। अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं। ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं।
 प्रार्थी
एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा)


यह है वो चिट्ठी जिसने एक बलात्कारी का अंत किया । जिस ‘महाराज’ की बात ऊपर की गई है, वो रेपिस्ट गुरमीत सिंह है । केस धीमा चलाने की लगातार कोशिश हुई 2013 में इस केस में सबूतों पर बहस पूरी हो गई थी। सुनवाई के दौरान राम रहीम की ओर से कभी सुप्रीम कोर्ट में तो कभी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका लगा दी जाती रही। इससे केस काफी धीमी रफ्तार से चला। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद राम रहीम ने फैसला सुनाने पर रोक चाही । जून 2017 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया । जुलाई 2017 में हाई कोर्ट ने सीबीआई की ट्रायल कोर्ट से इस मामले में सुनवाई ‘जल्द से जल्द’ पूरी करने को कहा था।
मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, और नतीजा आज सामने है....!!!

इस पोस्ट को लींक के स्वरुप मे ज्यादा से ज्यादा शेअर करे और आगे हमारे देश की बहन बेटीओ के साथ ऐसे मामले होने से बचाए।

जय भारत
जय संविधान



यही है वह 'गुमनाम' चिट्ठी, जिससे उजागर हुई गुरमीत राम रहीम के अत्याचार की दास्तां




पत्रकार श्री रामचन्द्र छत्रपति का बेटा. 

August 26, 2017

In Photos : डेरा भक्तो का आतंक और सरकार की नाकामी

By News Desk ॥ 26 Aug 2017

एक बलात्कारी बाबा के समर्थकाे ने 5 राज्य के तंत्र को हिला कर रख दिया क्या फर्क रह गया तालिबान,हिजबुल,IS के आतंकवादीयो में और डेरा के भक्तो में.

















"બંધારણ જ પ્રથમ અને અંતીમ ઉપચાર..."

By Rahul Vaghela || 26 Aug 2017


22 ઓગસ્ટ 2017 - 03 વિ. 02 અને 
24 ઓગસ્ટ 2017 - 09 વિ. 00

બે ઐતિહાસિક દિવસો અને બે ઐતિહાસીક નીર્ણયો લેવાયા લોકશાહીનાં અતીમહત્વનાં અંગ એવી ન્યાયપાલીકા દ્વારા કે જેનાં પર હજું પણ આ સ્વતંત્ર અને ગણતંત્ર ભારત દેશની ગરીબી, અન્યાયોનો ભોગ બનનારી, અસમાનતાનો ભોગ બનનારી અને ભ્રષ્ટાચારનો ભોગ બનનારી પ્રજાનો વિશ્વાસ થોડા અંશે ટકી રહ્યો છે.
સૌ કોઇ આ બંને ચુકાદાઓ એટલા માટે ઐતિહાસીક ગણે છે કારણ કે એક ચુકાદોએ પુરુષપ્રધાન સમાજ વ્યવસ્થાની વ્યક્તિગત સરમુખત્યારશાહી (હિટલરશાહી) અને બીજો ચુકાદો મળેલ સત્તાને કારણે સરમુખત્યારશાહી હક્કો ભોગવતા રાજતંત્ર સમુહને ધોબીપછાડ આપનાર છે.
22 ઓગસ્ટે, સર્વોચ્ચ ન્યાયાલયનાં પાંચ જજો દ્વારા એકસાથે ત્રણ તલાકના કહેવાતા ધાર્મિક (કુ)રીવાજને 02ની સામે 03ની બહુમતિથી રદીયો આપ્યો અને ત્રણ તલાકને ગેરબંધારણીય ઠેરવ્યું. જયારે બીજા ચુકાદો બંધારણીય બેચ દ્વારા પ્રાયવશી(અંગતતા) પર આપ્યો. જેમાં 09 જજોએ એક સહમતિથી ચુકાદો આપીને બંધરણીય ગરીમાને એક નવું આયામ આપ્યું છે અને સ્પષ્ટ કરી આપ્યું કે મુળભૂત અધીકારો પર કોઇ પણ રીતે તરાપ કે કાતર ફેરવી શકાતી નથી. હા એ વાત ખરી કે Fundamental rights is not absolut but there is reasonable restrictions  (only if it has reasonable basis or reasonable materials to support it).
ચુકાદમાં કોઇ પણ વ્યક્તિની પ્રાયવશી એ બંધારણના અનુચ્છેદ 21 મળેલ જીવન અને શરીર સ્વાતંત્ર્યનું રક્ષણનો જ ભાગ છે.

ઉપરોક્ત બંન્ને ઐતિહાસીક ચુકાદાઓ એ સ્પષ્ટ કરી આપ્યું છે કે કોઇ પણ મુળભૂત અધીકરોનું અવમૂલ્યન થતું હોય અથવા રોકાય જતા હોય તો તેને સામે મક્કમ રીતે ન્યાયની માંગ કરવામાં આવે તો ન્યાય જરૂરથી મળે જ છે. અન્ય એક વાત પણ સ્પષ્ટ થાય છે કે કોઇ પણ સામાજિક વ્યવસ્થા જેમાં મૂળભુત આધીકારોની અનદેખી કરી કોઇ પૂર્વવ્રત પ્રથા પ્રમાણે નહીં ચાલ્યા કરે તથા જ્યારે અરજકર્તા જસ્ટી.(નીવૃત) કે. એસ. પૂટ્ટાસ્વામી અને અન્યના પ્રાયવશી બાબતના ચુકાદા પરથી કહી શકાય કે કોઇ પણ સરકારએ મેનેજર કે જનતાની સર્વીસ પ્રોવાઇડર છે નહીં કે માલિક એટલે તેણે કોઇ પણ વ્યક્તિની અંગતતામાં તેણી જાણ બહાર કે પુછ્યા વગર કોઇ પણ અડપલા કરવાના નથી.
દોસ્તો આ તકે મને અતીપ્રીય એવી 3 ઇડીયટનો ફીલ્મનો તકીયા કલામ યાદ આવે છે "ऐ मंतर बेटा याद करलो यहा इसकी बहुत जरुरत पडने वाली है ।" તો દોસ્તો  હાલ જે પરીસ્થિતીમાં દેશ ચાલી  અને પસાર થઇ રહ્યો છે એ સ્થીતીએ હું પણ આપને એક મંત્ર આપવા માંગુ છે કારણ આગળ જતાં આ આજ ઉપયોગી થવાનો છે...જો કે આ મંત્ર મારી કોઇ ઘરની ઉપજ નથી આ તો સ્વતંત્રતા સમયનાં ભારતના શ્રેષ્ઠ બુધ્ધિધનની 2 વર્ષ, 11 મહીના અને 17 દિવસની મહેનતનો અર્ક છે. હા, હું વાત કરી રહ્યો છું ભારતીય બંધારણનો મુસદ્દો તૈયાર કરવાં લાગે સમય અને તેનો નીચોડ એટલે બંધારણનું આમુખ અને તેમાં જ છે દરેક ભારતીયોએ ગોખી લેવાનો મહામંત્ર એટલે કે 
  • JUSTICE (ન્યાય-સામાજિક, આર્થિક તથા રાજકીય ), 
  • LIBERTY (સ્વાતંત્ર્ય- વિચાર, અભિવ્યક્તિ, માન્યતા, શ્રધ્ધા તથા પૂજા),
  • EQUALITY (દરજ્જાની તથા તક અપાવવા) AND 
  • FRITERNITY (ભાતૃભાવ)


કોઇ પણ જગ્યાએ કે કોઇ પણ સરકારી નીતિ/યોજનામાં જો ઉપરોક્ત 04 શબ્દોમાંથી કઇ પણનો ઉલંઘન કે રોક લાગતી હોય તો સીધો જ બંધારણીય મૂલ્યોનો ભંગ થાય છે અને લોકશાહીના મહત્વનાં આધારસ્તંભ એવા ન્યાયતંત્રનો સહારો લઇને ચોક્કસ વીજયી થવાય છે, જેવી રીતે સાયરા બાનો  તથા અન્યો અને જસ્ટી.(નીવૃત) કે. એસ. પૂટ્ટાસ્વામી તથા અન્યોનો થયો...
મે તો ગોખી લીધો છે આ મંત્ર અને જયા જયા નોકરી કરી ત્યાં ત્યાં દિવાલે લગાવી, સમજાવવા પ્રયત્નશીલ રહું છુ સૌ સહકર્મીઓ અને મીત્રોને...
"રાષ્ટ્ર કે કોઇ સમાજ વ્યવસ્થા નથી ચાલતી કોઇની મન-મરજીથી,
પણ અંતે તે તો ચાલે છે બાબાસાહેબના બંધારણથી...."

રાહુલ વાધેલા 
જય ભારત...જય સંવિધાન....



સાયરા બાનું...



 91 વર્ષીય નીવૃત જસ્ટિસ પુટ્ટાસ્વામી..