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August 08, 2017

साथी अरविंद खुमाण और उनकी टीम का नेक काम : 4 साल कि बच्ची पर हिंसा करने वालो पर कार्रवाई

By BlueDiary News Desk || 08 Aug 2017 || 15:03

(Image Times of India 08/08/2017)
कल रक्षाबंधन मे मौके पर हि एक दील जंजोड देने वाले घटना सामने आई है. एक चार साल की बच्ची को बुरी तरह जख्मी हालत मे पाया गया. हिंसा से जुडा ये मामला लग रहा है. हिंसा करने वाले इतने भी क्रुर कैसे हो सकते है की एक नन्ही बच्ची पर इस तरह से जुल्म ढाये. 
एक चार वर्षीय लड़की, जिसे कई दिनों तक  बेरहमी से मारा-पीटा गया था, उसे अमरेली जिले के चांच गांव से बचा लिया गया और सोमवार को राजुला शहर में अस्पताल में भर्ती कराया गया. ये पुरे मामले पर मदद करने वाले अरविंद खुमाण जो कि एक सामाजीक कार्यकर है और गरीबो को कानुनी मदद और अन्य सहायता करते है, उन्हो ने कहा कि ये बच्ची अपनी मां के साथ राजुला रेल्वे स्टेशन के पास रह रही थी. ये लोग कोळी समाज से है. लगभग एक महीने पहले एक स्थानीय व्यक्ति ने उस छोटी बच्ची को चांच गांव में रहने वाले किसी परिवार के पास भेजने को कहा था जो उन्हे शिक्षीत करेगे ऐसा कहा गया था. हालांकि, इस लड़की को वहां अच्छे से नही रखा गया एवं बुरी तरह से मारा-पीटा जाता था.

चांच गांव के कुछ लोगों ने बच्ची के मामा को बताया कि उस बच्ची को ठीक से नही रखा जाता और यातनाए दी जाती है. ये बात जानकर बच्ची के मामा लड़की की को साथ लेकर उसे वापीस लाने के लीये गये. बडी जद्दोजहद के बाद लडकी को किसी तरह से वहा से लाया गया और राजुला अस्पताल मे भर्ती कराया गया. बच्ची बहोत बुरी तरह से जख्मी थी. अरविंद खुमाण और किशोर भाई को इस मामले कि जानकारी मिलते हि वह राजुला अस्पताल के लीये रवाना हुए. बच्ची के घाव काफी गहरे थे उसके शरीर बहोत सी जगहो पर और पर उसकी उंगलियों बीच एक चाकू जैसी नुकिली चीज के साथ भी देखे गये है. निचे दी गई तसवीर मे आप देख सकते है.

अरविंद भाई ने ये भी आशंका जताई है की लडकी को वहा पर बेचा गया हो सकता है. क्योकी जब उसे लेने के लीये बच्ची के मामा और उसकी मां चांच गांव मे गये तो वहा पर सामने वालो ने ऐसा दावा कीया की लडकी को पैसे देकर खरीदा गया है. ये बहोत हि गंभीर मामला है. 

पुलिस के उप अधीक्षक राजेश परमार ने बताया कि इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है और POCSO एक्ट के तहत इस मे आगे कि कार्यवाही होगी. पुलीस ने  बच्ची को जहा पर रखा गया था उस घर के मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कि है. पुलीस का कहना है कि आगे जांच के बाद ही हकीकत सामने आयेगी.

आप को बता दे कि इस पुरे मामले मे मिडिया का बहोत हि अच्छा प्रतीसाद रहा है और अरविंद खुमाण, किशोर भाइ धाखडा और उनके साथीओ ने इस मे पुरी तरह से सहायता कि और आगे भी इस मे बच्ची को न्याय दीलाने मे साथ खडे रहेगे. अरविंद खुमाण का आदर्श बाबा साहब डॉ आंबेडकर है वो अपने आदर्श बाबा साहब का सामाजीक न्याय का सिद्धांत आगे बढाने मे एक महत्वपुर्ण योगदान दे रहे है. उन्होने ये पुरी घटना अपने फेसबुक एकाउंट के जरीये लोगो के सामने रखा. इस खबर के अंत मे उनके फेसबुक पोस्ट का लींक दीया गया है आप उन्हे इस सराहनीय कार्य के लीये अपने प्रतीभाव दे सकते है. 








July 11, 2017

गुजरात मे अखबार बदलते ही अमरनाथ हमले की बस का ड्राईवर बदल जाता है

By Vishal Sonara




संदेश की ओफीशीयल साईट मे एक ही खबर के दो अलग अलग रुप देखने के बाद गुजरात की अग्रीम माने जाने वाली दुसरे अखबारो की वेबसाईट मे जाकर देखा तो अलग ही नजारा देखने को मीला.
संदेश ने अपनी एक खबर मे ड्राईवर हर्ष को और एक खबर मे सलीम दर्शाया है.

ईस तरह एक हि खबर क लीये दो अलग नाम लीखने की क्या आवश्यकता है और क्या मंशा है वेबसाईट चलाने वालो की यह तो हम नही कह सकते पर ये जरुर बात है की एडीटर श्री अपना काम ठीक से नही कर रहे.
ये दोनो लींक ये लीखा जा रहा है तब भी मौजुद है वेबसाईट पर.
संदेश की खबर ः અમરનાથ યાત્રાળુઓ પર હુમલો: ડ્રાઇવર હર્ષ દેસાઇએ વર્ણવી આતંકી હુમલાની કંપાવનારી પળ
उपर वाली खबर के 4 घंटे बाद की संदेश की खबर ः આતંકવાદી હુમલામાં બસ ડ્રાઇવર સલીમની બહાદૂરીથી બચી અનેક જિંદગીઓ


गुजरात समाचार की साईट मे ड्राईवर का नाम सलीम मीर्जा दीखाया गया है.
सलीम मीर्जा और सलीम शेख दो अलग नाम है या एक ही ये तो हमे पता नही है ड्राईवर का नाम तो सलीम है ये तसल्ली के साथ हम गुजरात समाचार को धन्यवाद देते है.
गुजरात समाचार की खबर ः અમરનાથ એટેકઃ ડ્રાઈવરની હિંમતે બચી ગયા શ્રધ્ધાળુ, નહીતો કોઈ ન બચત

दिव्यभास्कर की साईट मे अमरनाथ बस का ड्राईवर हर्ष देसाई है वो सब से अलग मालुम होते है.
बीबीसी न्युज की खबर के अनुसार हर्ष बस का मालीक था और सलीम ड्राईवर पर यहा पे दिव्यभास्कर के तंत्री महोदय को अपने स्टाफ के कुछ ज्यादा ही भरोसा मालुम पडता है उन्हो ने खबर की सत्यता की परवाह कीये बीना एक पोस्टर तक बना डाला और अपनी खबर के साथ जोड दीया.
दिव्य भास्कर की खबर ः હર્ષે 25 આતંકીના ઘેરામાંથી બસ કાઢી, બે ગોળી વાગી છતાં 45ના જીવ બચાવ્યા

नवगुजरात समय की साईट मे ड्राईवर का नाम सलीम भाइ लीखा गया है जो काफी कुछ सोर्स के साथ मेल खा रहा है.

हांलाकी यहा पर टाईपींग मीस्टेक देखा जा सकती है पर ये बात कोइ माईने नही रखते खबर सच्ची होनी चाहीये.
नवगुजरात समय की खबर ः અમરનાથ અટેક: ડ્રાઈવરે હિંમત ન બતાવી હોત તો કોઈ ન બચ્યું હોત.

गुजरात के एक और अखबार फुलछाब की साईट पर तो अमरनाथ के सबंध मे एक भी खबर नही है.
ये हालात है गुजरात मे लोकशाही के चौथे स्तंभ का.
आज के हालात मे देश मे सांप्रदायीकता का जोर है उस मे ये बात बहोत मायने रखती है की एक मुसलमान ने अमरनाथ यात्रीयो की जान बचाई पर कुछ लोग ये नही होने देना चाह रहे. जीनको आदत बन चुकी है मसाला न्युज बनाने की वो कुछ भी कर सकते है.
हर को अपने से न्युस बना रहा है, हैरान करने वाली बात तो ये है की ये सब गुजरात मे मेईन स्ट्रीम मीडिया गीने जा रहे है. संदेश ने तो हद ही कर दी दोनो तरफ की बाते छाप दी. सब का चहीता बन ने की होड हो जैसे. गुजरात समाचार , नवगुजरात समय की बाते मेल खा रही है सरनेम को छोड दे तो वो लगभग एक समान ही है. दिव्य भास्कर की बात ये दोनो से एक दम अलग है. और संदेश दोनो तरफ है. 
हर तरफ से हो रही मुस्लीम ड्राईवर की तारीफ कुछ नफरत के पुजारीओ को पसंद न आ रही हो और वह सोशल मीडिय मे ऐसी बाते फैलाते है वह हम देखते है पर अगर मेईन स्ट्रीम मीडिया गीने जाने वाली समाचार एजंसीया इस तरह की हरकतो पर उतर आये तो क्या कहे ईस देश के मीडिया का.

( अगर इस तरह की कोइ बात आप के ध्यान मे आये तो बेजीजक आप अपनी बात हम तक पहुंचाये. )

Read : - गुजराती न्युजपेपर "संदेश" की साईट के दो संदेश

May 29, 2017

અસ્પૃશ્યતા નિવારણ અને અસ્પૃશ્યોના અધિકાર બાબતે સમાચારપત્રોની ભુમિકા કેટલી..???



મારો જવાબ છે... મહા શૂન્ય.

ભારતમાં અંગ્રેજોએ સત્તા પ્રાપ્ત કરી ત્યારે ગુજરાતનો હિન્દુ સમાજ વિવિધ સંપ્રદાય, જૂથ, જાતિઓમાં વિભાજીત હતો. વણઁવ્યવસ્થા મુજબ ઉચ્ચનીચના વાડાઓમાં વહેંચાયેલ હતો. તેનું કડકાઈથી પાલન પણ કરવામાં આવતું હતુ.
19 મી સદીમાં અવાઁચીન કેળવણીનો ફેલાવો થતો ગયો તેમ તેમ ભણેલા વગોઁના લોકોમાં એક એવો વગઁ પેદા થયો જે સુધારાવાદી કે સુધારક તરીકે ઓળખાયો. અહીં કેટલીક ભિન્નતાઓ જોવા મળી. કેટલાક સુધારાવાદીઓએ અંગ્રેજો દ્વારા સ્થાપિત વહીવટી, શૈક્ષણિક સંસ્થાઓનો સૌથી વધુ ફાયદો ઉઠાવ્યો અને સામાજિક અનિષ્ટો બાબતે ઝુંબેશ આદરી. બીજી તરફ કેટલાક સુધારાવાદીઓએ પોતાની જાતિઓના ઉત્કષઁને જ પ્રોત્સાહન આપ્યું. પરિણામ સ્વરૂપ આ જાતિઓ કેળવણીની બાબતમાં અતિ સમૃધ્ધ બનતી ગઈ. સરકારી નોકરીઓ અને વ્યવસાયોમાં વધુને વધુ લાભ લેતી ગઈ.
હવે ખરો દંભ અને પુવઁગ્રહ અહીં જોવા મળ્યો. ગુજરાતના સામાજિક પરિવતઁનનું એક દંભી પાસુ એવું હતુ કે એક તરફ મધ્યમવગીઁય લોકો શાળાઓ, હોસ્પિટલો અને જાહેર સેવાઓનો લાભ લેવા માંગતા હતા તે માટે કેટલાક કાયઁક્રમો પણ કરી રહ્યા હતા.. પરંતુ અસ્પૃશ્યોને આ લાભ લેવા બાબતે ભયંકર વિરોધ કરી રહ્યા હતા.
ડિસેમ્બર 1968 ભરૂચમાં એક વ્યાપારિક પ્રદશઁન યોજાયેલ. તેમાં કેટલાક અંગ્રેજ અધિકારીઓ તથા વ્યાપારીઓ હાજર રહેલા. તેમાં ગુજરાત, સૌરાષ્ટ્રના દેશી વ્યાપારીઓ પણ હતા. આ પ્રદઁશનમાં અંગ્રેજ વ્યાપારીઓએ દેશી વ્યાપારીઓ તરફે આભડછેટ ભયુઁ વતઁન દાખવેલુ, ત્યારે આ દેશી ભારતીય, ગુજરાતી વ્યાપારીઓએ પ્રદઁશન મંડપની બહાર અંગ્રેજોની રંગભેદની નિતિ વિરૂધ્ધ જબરજસ્ત ધમાલ મચાવેલી. ગુજરાતના તમામ સમાચારપત્રોએ આ વ્યાપારીઓની આ ઝુંબેશમાં જોડાયા હતા અને સમથઁન આપીને રંગભેદની નિતી વિરૂધ્ધ ખુબ જ કાગારોળ મચાવી હતી. 


મુદ્દાની વાત હવે આવે છે.. રંગભેદની નિતીનો વિરોધ કરી અંગ્રેજો સામે કાગારોળ મચાવનારા આ સમાચારપત્રો 1863 થી 1985 દરમિયાન સવણઁ હિન્દુઓ સાથે અસ્પૃશ્યો આગગાડીમાં પ્રવાસ ન કરે તે માટે અખબારી ચળવળ ચલાવી હતી.
(સોસઁ: કપરાં ચઢાણ- લેખક- યોગેન્દ્ર મકવાણા પાનનં-57-58)
- જિગર શ્યામલન




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