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September 11, 2017

अखाड़ा परिषद कि माने तो अभी के लिए देश मे सिर्फ 14 ही फर्जी साधु-बाबा है

By Vishal Sonara || 11 Sep 2017 


देश मे बढते साधु संतो और बाबा लोगो के अपराधो के चलते लोगो मे साधु संतो के प्रती अविश्वास को भांपते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद नामक संस्था ने एक लिस्ट जारी की है. उस लिस्ट के मुताबीक 14 ऐसे साधु संत और बाबा है जो फर्जी बाबा है...!!! लिस्ट मे कुछ इस प्रकार के नाम सामेल है.
  1. आसाराम उर्फ आशुमल शिरमलानी
  2. सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां
  3. सचिदानंद गिरी उर्फ सचिन दत्ता
  4. गुरमीत राम रहीम ईंसा, डेरा सच्चा सौदा सिरसा
  5. ओम बाबा उर्फ विवेकानंद झा
  6. निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह
  7. इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी
  8. स्वामी असीमानंद
  9. ऊं नम: शिवाय बाबा
  10. नारायण साईं
  11. संत रामपाल
  12. आचार्य खुशमुनि
  13. बृहस्पति गिरि
  14. मलखान सिंह

ये अखाडा परिषद का ओरीजनल लेटर है. 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद 13 अखाड़ों की संयुक्त संस्था है, जिसमें लाखों की संख्या में साधु-संत-बाबा हैं. 10 सितम्बर, 2017 को 2019 में लगने वाले अर्धकुम्भ मेले को लेकर परिषद द्वारा इलाहाबाद के बाघंबरी मठ में एक कार्यकारिणी  बैठक का आयोजन किया गया था. अखाड़ा परिषद की कार्यकारिणी में सभी अखाड़ों के दो-दो सदस्य हैं. इस बैठक मे साधु बन बैठे और आपराधीक मामलो के दोषी साधुओ पर विमर्श कीया गया और नकली साधुओ का बहीष्कार करने के लीए लोगो को अपील की गई. नकली साधुओ को पहचानने के लीए कार्यकारिणी लीस्ट बनायेगी ये तय हुआ. इस नीर्णय के चलते उस लीस्ट की पहली सुची लोगो के सामने रखी गई. सभी अखाडे के दो दो सभ्य जो की कार्यकारिणी के सदस्य होते है वह 26 सदस्य मिलकर फर्जी बाबाओं की सूची बनाएंगे.  पहली सूची जारी हो गई अब आगे भी लगातार कई सूचियां आएंगी. 

साथ साथ...
  • इस बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने संत की उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है.
  • विहिप, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के साथ मिलकर काम करता है. जैन ने कहा, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का मानना है कि संत की उपाधि का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है इसलिए परिषद ने यह उपाधि देने के लिए एक प्रक्रिया तय करने का फैसला किया है. अब से किसी व्यक्ति की पड़ताल करने और उसका आकलन करने के बाद ही यह उपाधि प्रदान की जाएगी.
  • संत की उपाधि देने से पहले अखाड़ा परिषद यह भी देखेगी कि व्यक्ति की जीवनशैली किस तरह की है.
  • किसी  संत के पास नकदी या उसके नाम पर कोई संपत्ति ना हो ये सुनीश्चीत किया जायेगा.
कौनसे साधु संत अब इन के अगले लीस्ट मे आते है ये अब देखना रहेगा. हालांकी ये सब किस आधार पर तय किया जायेगा या किया जा रहा है ये जानकारी किसी के पास नही है. पर लोगो का संतो पर से उठते जा रहे विश्वास को फीरसे वेग देने के लीये का ये प्रयास ज्यादा मालुम पड रहा है. अखाडा परिषद का ये नीर्णय लोगो के दिमाग मे बैठेगा या नही ये भी एक गंभीर प्रश्न है. आने वाले दिनो मे लोगो की और ये नकली संतो की क्या प्रतीक्रीया आती है ये देखना है अब.

अखाडा परिषद को ये सब तय करने का अधीकार है या नही ये भी एक सोचनेलायक विषय है. पर एक बात तो तय है कि अखाडा परिषद ने दुसरे साधु संतो को सर्टीफीकेट देने का तय कर के खुद का स्थान सब से उपर है ये तो साबीत नीस्चीत तौर पर करने का प्रयास किया है. 

September 03, 2017

બાબા, સાધુ અને સાધ્વીઓ

By Dinesh Makwana  || 01 Sep 2017




ચારે બાજુ રામ રહીમની ચર્ચા ચાલી રહી છે. દરેક ચેનલ રોજ તેના જુદા જુદા કારનામા જાસૂસી પત્રકારત્વ ના નામે બતાવી રહી છે. કેટલાક વીડીયો યુ ટ્યુબ પર અપલોડ થઇ રહ્યા છે તેમાં સમાજને સુધારવા માટે બહુ લાંબા લચક લેકચર આપી રહી છે. દરેક કાર્યાલયોમાં, દરેક પાનના ગલ્લે, ચોરે ચટ્ટે માત્ર અને માત્ર રામ રહીમની ચર્ચા ચાલી રહી છે. પણ આ કિસ્સામાં શુ શીખવાનું છે, શુ શીખી રહ્યા છે, કેમ આમ થાય છે, આ પહેલો કિસ્સો નથી ને છેલ્લો પણ નથી. તેમ છતા આપણી માનસિક સ્થિતિ કેમ આમ જ રહે છે? વર્ષો પછી પણ ગુલામોની સંખ્યા વધતી કેમ જાય છે. કેટલાક પુસ્તકોના વાંચનને આધારે આના વિશે ચર્ચા કરુ છુ. શ્રધ્ધા અને અંધશ્રદ્ધા વચ્ચે બહુ પાતળી દિવાલ છે તેના વિશે મે એક લેખ લખ્યો હતો તેથી તેના વિશે ચર્ચા કરીશ નહી.

સૌરભ શાહ ઇન્વેસ્ટીગેટીવ પત્રકાર છે. ૧૮૬૦ મા બનેલા બનાવને આધારે બોમ્બે હાઇકોર્ટ મા એક કેસ દાખલ થાય છે. કરસનદાસ મુળજી નામના વૈષ્ણવે જદુનાથ મહારાજ સામે કેસ  દાખલ કરે છે જે બહુચર્ચિત લાયેબલ કેસ તરીકે ગણાય છે. આ લાયેબલ કેસના તમામ કાગળો વાંચી તપાસીને સૌરભ શાહે 'મહારાજ' નામની નવલકથા લખી છે. પુષ્ટિ માર્ગના વૈષ્ણવ ના મંદિરને હવેલી કહે છે અને તેના પુજારી મહારાજ તરીકે ઓળખાય છે. આ મહારાજ ૧૮૬૦ મા કેવા કેવા કરતુતૌ કરે છે, કેવી સેકસ લીલા કરે છે. કેટલાક વર્ણનો વાંચીને અરેરાટી ઉપજે છે. મહારાજ પોતાના સેકસને શ્રીકૃષણની લીલા ગણાવે છે અને તેના દર્શનની પણ કિંમત માંગે છે. પણ જદુનાથ મહારાજને દોષિત જાહેર કરવામાં આવે છે. આટલા વર્ષો પછી હવેલી છે, મહારાજ છે અને તેના ભક્તો છે.

આની પાછળ મુળ ભારતની આર્થિક સ્થિતિ પણ તેટલી જ કારણભુત છે. જયા ૮૦ ટકાથી વધુ લોકોનું ભવિષ્ય સલામત ના હોય ત્યારે આ ભગવાનના ઢોંગી ચેલા પાસે આપણે આપણી સમસ્યાનું સમાધાન શોધીયે છે.

આશારામ વિશે લખ્યુ ત્યારે મારા કાકાનો દીકરો તેનો ભક્ત છે તે માનવા તૈયાર નહી. તેની દલીલ હતી કે આ ખ્રિસતી લોકોનું બદનામ કરવાનું કાવતરું છે. ભુજથી એક મિત્રએ મને આ વિશે કહ્યુ. મુંબઈથી પ્રવિણ સોલંકીએ કડક ભાષામાં કહ્યુ. મે કહ્યુ મારી કરતા સરકાર વધારે બુદ્ધિશાળી છે, કોર્ટ પણ છે તો પછી બે વર્ષથી અંદર કેમ છે. કોઇની પાસે જવાબ નહોતો.

પણ આપણે તર્ક  કરતા નથી. તમારી સમસ્યા નો ઉકેલ ખુદ ભગવાન નથી બતાવી શકતા તો આ તેમના ચેલા કેવી રીતે બતાવી શકે..

ઇશ્વર વિશેના લેખમાં મે બહુ સ્પષ્ટ કહ્યુ હતું કે કોઇ ઇચ્છતો નથી કે ઇશ્વર તેમની પાસે રહે કારણ કે તે એવું કોઇ કામ નહી કરી શકે જેને ઇશ્વર જોઇ શકે. ચોરી કરવી, જુઠુ બોલવું, વગેરે વગેરે. આપણે માત્ર આશીર્વાદ ઇચ્છીયે છે પણ આપણે શુ કરીયે છે તે ઇશ્વરને બતાવવા માંગતા નથી. બીજા દિવસે મંદિરમાં જઇને આપણે બે મિનિટ પશ્ચાત્તાપ કરીને ઇશ્વરને બેવકૂફ બનાવીયે છે. જો ઇશ્વરનુ ખરેખર અસ્તિત્વ હોય તો અને તમારા પાપ ને ભેગા કરીને સજા આપે તો એક દિવસ પણ તમે જીવીત રહી ના શકો. પણ આ શક્ય નથી અને આવુ થતુ નથી. આપણે કહેવાતા ઇશ્વરને રોજ બેવકૂફ બનાવતા રહીયે છે.

છેલ્લે ગયા રવિવારે મારી દીકરીએ કહેલી એક વાત કહી જે બધાની અને મારી આંખો ઉઘાડી નાંખે તેવી છે. તેણે કહ્યુ કે સંકલ્પ ટ્રસ્ટ મા રહીને જે બાળકોને તમે મદદ કરો છો તેમાં એવો તો કોઇ સ્વાર્થ નથી ને કે અમને( મારા દીકરા દીકરીને) કોઇ લાભ મળે, સારી નોકરી મળે. જો આવુ વિચારીને કામ કરતા હોય તો બંધ કરી દેજો કારણ કે અમે અમારી મહેનતથી શક્ય હશે ત્યાં સુધી આગળ વધીશું. કોઇના આશિર્વાદ થી અમારે આગળ વધવું નથી.

મારી પાસે શુ શબ્દો હોય?

દિનેશ મકવાણા
અજમેર રાજસ્થાન
૧/૯/૨૦૧૭

August 27, 2017

पढ़िए, राम रहीम केस की पीड़िता साध्वी की चिट्ठी, जिससे शिकंजे में फंसा बलात्कारी बाबा

By Vishal Sonara || 27 Aug 2017 at 09:13

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दो महिलाओं से बलात्कार के आरोप में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने दोषी करार दिया है। 
रेप पीड़िता साध्वी की प्रधानमंत्री को लिखी गुमनाम चिट्ठी को पंचकूला के स्थानीय सांध्य दैनिक अखबार 'पूरा सच' में अक्षरश: प्रकाशित किया गया था। इसके बाद 'पूरा सच' अखबार के संपादक रामचन्द्र छत्रपति के घर में घुसकर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। उसी चिट्ठी के आधार पर राम रहीम को सीबीआई कोर्ट ने रेपिस्ट करार दिया है। पीडीत साध्वी की उसी गुमनाम चिट्ठी को आप पढ़िए किन शब्दों में पीड़िता ने बयां किया था दर्द-:


सेवा में,
माननीय प्रधानमंत्री महोदय जी
श्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारत सरकार
विषय : डेरे के महाराज द्वारा सैकड़ों लड़कियों से बलात्कार की जांच करें।
 श्रीमान जी,
यह है कि मैं पंजाब की रहने वाली हूं और अब पांच साल से डेरा सच्चा सौदा सिरसा, हरियाणा (धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा) में साधु लड़की के रूप में सेवा कर रही हूं। मेरे साथ यहां सैकड़ों लड़कियां भी डेरे में 18-18 घंटे सेवा करती हैं। हमारा यहां शारीरिक शोषण किया जा रहा है। साथ में डेरे के महाराज गुरमीत सिंह द्वारा यौनिक शोषण (बलात्कार) किया जा रहा है। मैं बीए पास लड़की हूं। मेरे परिवार के सदस्य महाराज के अंध श्रद्धालु हैं जिनकी प्रेरणा से मैं डेरे में साधु बनी थी।
साधु बनने के दो साल बाद एक दिन महाराज गुरमीत की परम शिष्या साधु गुरुजोत ने रात के 10 बजे मुझे बताया कि आपको पिता जी ने गुफा (महाराज के रहने का स्थान) में बुलाया है। मैं क्योंकि पहली बार वहां जा रही थी, मैं बहुत खुश थी। यह जानकर कि आज खुद परमात्मा ने मुझे बुलाया है। गुफा में ऊपर जाकर जब मैंने देखा महाराज बेड पर बैठे हैं। हाथ में रिमोट है, सामने टीवी पर ब्लू फिल्म चल रही है। बेड पर सिरहाने की ओर रिवॉल्वर रखा हुआ है। मैं यह सब देखकर हैरान रह गई। मुझे चक्कर आने लगे। मेरे पांव के नीचे की जमीन खिसक गई। यह क्या हो रहा है। महाराज ऐसे होंगे? ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।
 
महाराज ने टीवी को बंद किया व मुझे साथ बिठाकर पानी पिलाया और कहा कि मैंने तुम्हें अपनी खास प्यारी समझकर बुलाया है। मेरा यह पहला दिन था। महाराज ने मेरे को बांहों में लेते हुए कहा कि हम तुझे दिल से चाहते हैं। तुम्हारे साथ प्यार करना चाहते हैं क्योंकि तुमने हमारे साथ साधु बनते वक्त तन-मन-धन सब सतगुरु के अर्पण करने को कहा था। तो अब ये तन-मन हमारा है। मेरे विरोध करने पर उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं हम ही खुदा हैं। जब मैंने पूछा कि क्या यह खुदा का काम है तो उन्होंने कहा -
1 - श्री कृष्ण भगवान थे, उनके यहां 360 गोपियां थीं जिनसे वह हर रोज प्रेम लीला करते थे। फिर भी लोग उन्हें परमात्मा मानते हैं, यह कोई नई बात नहीं है।
2 - यह है कि हम चाहें तो इस रिवॉल्वर से तुम्हारे प्राण पखेरू उड़ाकर दाह संस्कार कर सकते हैं। तुम्हारे घरवाले इस प्रकार से हमारे पर विश्र्वास करते हैं व हमारे गुलाम हैं। वह हमारे से बाहर जा नहीं सकते। यह तुमको अच्छे से पता है।
3 - यह कि हमारी सरकार में बहुत चलती है। हरियाणा व पंजाब के मुख्यमंत्री, पंजाब के केंद्रीय मंत्री हमारे चरण छूते हैं। राजनीतिज्ञ हमसे समर्थन लेते हैं, पैसा लेते हैं और हमारे खिलाफ कभी नहीं जाएंगे। हम तुम्हारे परिवार के नौकरी लगे सदस्यों को बर्खास्त करवा देंगे। सभी सदस्यों को अपने सेवादारों (गुडों) से मरवा देंगे। सबूत भी नहीं छोड़ेंगे। यह तुम्हें अच्छी तरह पता है कि हमने गुंडों से पहले भी डेरे के प्रबंधक फकीर चंद को खत्म करवा दिया था जिनका अता-पता तक नहीं है। ना ही कोई सबूत बकाया है। जो कि पैसे के बल पर हम राजनीतिक व पुलिस और न्याय को खरीद लेंगे।
इस तरह मेरे साथ मुंह काला किया और पिछले तीन मास में 20-30 दिन बाद किया जा रहा है। आज मुझको पता चला कि मेरे से पहले जो लड़कियां रहती थीं, उन सबके साथ मुंह काला किया गया है। डेरे में मौजूद 35-40 साधु लड़की 35-40 वर्ष की उम्र से अधिक हैं जो शादी की उम्र से निकल चुकी हैं। जिन्होंने परिस्थितियों से समझौता कर लिया है। इनमें ज्यादातर लड़कियां बीए, एमए, बीएड, एमफिल पास हैं मगर घरवालों के अंधविश्र्वासी होने के कारण नरक का जीवन जी रही हैं।
हमें सफेद कपड़े पहनना, सिर पर चुन्नी रखना, किसी आदमी की तरफ आंख न उठाकर देखना, आदमी से 5-10 फुट की दूरी पर रहना महाराज का आदेश है। दिखाने में देवी हैं मगर हमारी हालत वेश्याओं जैसी है। मैंने एक बार अपने परिवारवालों को बताया कि डेरे में सबकुछ ठीक नहीं है तो मेरे घर वाले गुस्से में होते हुए कहने लगे कि अगर भगवान के पास रहते हुए ठीक नहीं है तो ठीक कहां है। तेरे मन में बुरे विचार आने लग गए हैं। सतगुरु का सिमरण किया कर। मैं मजबूर हूं। यहां सतगुरु का आदेश मानना पड़ता है। यहां कोई भी दो लड़कियां आपस में बात नहीं कर सकतीं। घरवालों को टेलीफोन मिलाकर बात नहीं कर सकतीं।
घरवालों का हमारे नाम फोन आए तो हमें बात करने का महाराज के आदेशानुसार हुक्म नहीं है। यदि कोई लड़की डेरे की इस सच्चाई के बारे में बात करती है तो महाराज का हुक्म है कि उसका मुंह बंद कर दो। पिछले दिनों बठिंडा की लड़की साधु ने जब महाराज की काली करतूतों का सभी लड़कियों के सामने पर्दाफाश किया तो कई साधु लड़कियों ने मिलकर उसे पीटा। जो आज भी घर पर इस मार के कारण बिस्तर पर पड़ी है। जिसका पिता ने सेवादारों से नाम कटवाकर चुपचाप घर बैठा दिया है। जो चाहते हुए भी बदनामी और महाराज के डर से किसी को कुछ नहीं बता रही।
एक कुरुक्षेत्र जिले की एक साधु लड़की जो घर आ गई है, उसने अपने घर वालों को सब कुछ सच बता दिया है। उसका भाई बड़ा सेवादार था, जो कि सेवा छोड़कर डेरे से नाता तोड़ चुका है। संगरूर जिले की एक लड़की जिसने घर आकर पड़ोसियों को डेरे की काली करतूतों के बारे में बताया तो डेरे के सेवादार / गुंडे बंदूकों से लैस लड़की के घर आ गए। घर के अंदर से कुंडी लगाकर जान से मारने की धमकी दी व भविष्य में किसी से कुछ भी नहीं बताने को कहा। इसी प्रकार कई लड़कियां जैसे कि जिला मानसा (पंजाब), फिरोजपुर, पटियाला, लुधियाना की हैं। जो घर जाकर भी चुप हैं क्योंकि उन्हें जान का खतरा है। इसी प्रकार जिला सिरसा, हिसार, फतेहबाद, हनुमान गढ़, मेरठ की कई लड़कियां जो कि डेरे की गुंडागर्दी के आगे कुछ नहीं बोल रहीं।
अत: आपसे अनुरोध है कि इन सब लड़कियों के साथ-साथ मुझे भी मेरे परिवार के साथ जान से मार दिया जाएगा अगर मैं इसमें अपना नाम-पता लिखूंगी। क्योंकि मैं चुप नहीं रह सकती और ना ही मरना चाहती हूं। जनता के सामने सच्चाई लाना चाहती हूं। अगर आप प्रेस के माध्यम से किसी भी एजेंसी से जांच करवाएं तो डेरे में मौजूद 40-45 लड़कियां जो कि भय और डर में हैं। पूरा विश्र्वास दिलाने के बाद सच्चाई बताने को तैयार हैं। हमारा डॉक्टरी मुआयना किया जाए ताकि हमारे अभिभावकों व आपको पता चल जाएगा कि हम कुमारी देवी साधु हैं या नहीं। अगर नहीं तो किसी के द्वारा बर्बाद हुई हैं। ये बता देंगे कि महाराज गुरमीत राम रहीम सिंह जी, संत डेरा सच्चा सौदा के द्वारा तबाह की गई हैं।
 प्रार्थी
एक निर्दोष जलालत का जीवन जीने को मजबूर (डेरा सच्चा सौदा सिरसा)


यह है वो चिट्ठी जिसने एक बलात्कारी का अंत किया । जिस ‘महाराज’ की बात ऊपर की गई है, वो रेपिस्ट गुरमीत सिंह है । केस धीमा चलाने की लगातार कोशिश हुई 2013 में इस केस में सबूतों पर बहस पूरी हो गई थी। सुनवाई के दौरान राम रहीम की ओर से कभी सुप्रीम कोर्ट में तो कभी पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका लगा दी जाती रही। इससे केस काफी धीमी रफ्तार से चला। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद राम रहीम ने फैसला सुनाने पर रोक चाही । जून 2017 में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया । जुलाई 2017 में हाई कोर्ट ने सीबीआई की ट्रायल कोर्ट से इस मामले में सुनवाई ‘जल्द से जल्द’ पूरी करने को कहा था।
मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है, और नतीजा आज सामने है....!!!

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जय भारत
जय संविधान



यही है वह 'गुमनाम' चिट्ठी, जिससे उजागर हुई गुरमीत राम रहीम के अत्याचार की दास्तां




पत्रकार श्री रामचन्द्र छत्रपति का बेटा. 

August 26, 2017

In Photos : डेरा भक्तो का आतंक और सरकार की नाकामी

By News Desk ॥ 26 Aug 2017

एक बलात्कारी बाबा के समर्थकाे ने 5 राज्य के तंत्र को हिला कर रख दिया क्या फर्क रह गया तालिबान,हिजबुल,IS के आतंकवादीयो में और डेरा के भक्तो में.