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August 14, 2017

गोरखपुर नरसंहार पर कविता : मासूम बच्चो के मां बाप के दर्द को महसूस करते हुये

By Veeru Ji  ||  13 Aug 2017 at 15:00


 कितनी मिन्नतों के बाद उसे पाया होगा।
तब जाके खुशियों का मौका आया होगा

कभी हाथों में तो कभी पलने में झुलाया होगा।
तब जाके बच्चे को चैन से सुलाया होगा।

उसकी किलकारी से पूरा घर चहकाया होगा।
उसे देख मां बाप का चैहरा मुशकुराया होगा ।

बच्चे को बुखार थोडा आया होगा
तब उसे गौरखपुर लाया होगा।

सहम कर डर चैहरे पे उतर आया होगा
जब बच्चे के मास्क में ऑक्सीजन न आया होगा।

आंखों से समंदर भी निकल आया होगा
जब जिगर के टुकडे को तडपता हुआ पाया होगा।

थम गंई होंगी सांसे जब बच्चे को खामौश पाया होगा।
जम गये होंगे होंठ जब बच्चे की लाश को उठाया होगा।

कल वो रोता था अब मां बाप को रुलाया होगा।
छोड गया लाल ये भी यंकी न आया होगा ।

कैसे अपने आप को समझाया होगा।
जब अपने कलेजे के टुकडे को दफनाया होगा।

चीख पुकार और मातम का साया होगा।
ये देख शर्म से आसमां भी शर्माया होगा

अभी तलक अन्न न खाया होगा
जब अांचल से दूध को बहाया होगा

हर बार बच्चे का चैहरा अपनी आंखों मे आया होगा।

जब अपने सामने बच्चे को खोया होगा...

July 25, 2017

फूलन देवी के बलीदान दिवस पर कवितायें

By Veeru Ji  ||  25 July 2017 at 15:00


फूलन देवी को समर्पित प्रथम कविता
लुट रही थी लाज कंही फूलन की खेत में।
तडप-तडप ऐडियां भी गड गईं थी रेत में।
चीखती थी जौर से और गिरती थी खेत में।
भूखी ही तडप रही दाना न पेट में
भूखे दरिंदों ने ले लिया चपेट में ।
जौरों से चीख रही चोट लगे पेट में
छीन लिये कपडे और घुमा दिया गांव में।
शर्म बाली बेडियां भी टूट गई पांव में।
भर रहै थे सब दरिंदे बारी बारी वांह में।
ढूब रही थी फूलन जैसे छेद नाव में
टूट गई फूलन जो खिल रही थी बाग में
सूख गये आंसू भी बदले की आग में
लेकर बंदूक वो भी निकल पडी गांव में।
कर कर के नंगे फिर मारती थी गांव में...



फूलन देवी पर दूसरी कविता
लूटकर लाज जब उसे नंगा घुमाया था।
उस बक्त उसे बचाने कोई कृष्ण नहीं आया था
तप रही थी धूप न ही बादलों का साया था
बैहसी दरिंदों ने नंगा घुमाया था।
देख रहै लोग मगर कोई नही आया था
किस से उम्मीद करे,कोई नही साया था
मर गई शरम वंही ऐक कसम खाया था
बदले की भावना से खून ऊतर आया था
उस दिन से फूलन में तेज नया आया था
लेने को बदला हत्यार फिर उठाया था
मार के दरिंदों को बदला चुकाया था।
नारी शक्ती को सच कर दिखाया था
उस दिन से फूलन का परचम लहराया था
ईज्जत से जीने का दौर नया आया था...