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August 27, 2017

તરણેતર ના મેળા મા "એક ગાય નુ દર્દ"

By Vishal Sonara || 27 Aug 2017 at 10:29

આપણા ગુજરાત ના પ્રખ્યાત તરણેતર ના મેળા મા આ વખતે એક ગુજરાત ના ગૌ ચાહકો માટે આયનો દેખાડતો એક સ્ટોલ જો કદાચ કોઇ મેળા મા ગયુ હોય તો એ જોયો હશે. 

આ સ્ટોલ ની ખાસીયત હતી "એક ગાય નુ દર્દ"

જ્યારે નજર સામે ગાય કચરો ખાતી હોય ત્યારે કચરા મા આપણે જ નાખેલુ પ્લાસ્ટીક પણ એના પેટ મા જતુ હોય એ જો દેખાતુ ન હોય તો કયા મોઢે ગાય ને પુજનીય માનવાનો ઢોંગ થઈ રહ્યો છે?

ગાયો ને ચરવા માટે ની ગૌચર ની સુવીધા કાયદા દ્વારા આપવામા આવે છે પણ એ ગૌચર અત્યારે ક્યા છે એ પ્રશ્ન કોઇ પણ ગૌસેવા વાળા કે ગાય પ્રેમી જનતા એ ઉઠાવ્યો નથી. 

પણ જો ગાય ના મુદ્દા પર મુસલમાન કે દલિત પર અત્યાચાર કરવાનો મોકો મળે તો કહેવાતા ગૌરક્ષકો એક પણ મુદ્દો છોડવા તૈયાર નથી. 

આ કહેવાતા ગૌરક્ષકો અને ગાય પ્રેમી જનતા ને સાચુ ચીત્ર દેખાડવાના એક પ્રયાસ સ્વરુપે આપણા કર્મનીષ્ઠ વ્યક્તિ નટુ ભાઈ પરમાર અને એમની ટીમ દ્વારા ગુજરાત ના ઐતીહાસીક કહેવાતા એવા તરણેતર ના મેળા મા ફક્ત ગાય માટે જ એક સ્ટોલ નાખવામા આવ્યો હતો.

જેમા ફોટા મા જોઇ શકાય છે એમ એક ગાય ની પ્રતીકૃતી રાખવામા આવેલ હતી અને એના પેટ મા મૃત ગાય ના પેટ માથી નીકળેલ પ્લાસ્ટીક ની થેલીઓ અને પ્લાસ્ટીક નો કચરો કે જે ગાયો માટે મરણતોલ બની રહે છે. એ રાખવામા આવેલ. તથા એ જ પ્લાસ્ટીક ને ડીસ્પ્લે મા લોકો જોઇ શકે એ માટે રાખવામા આવેલ હતુ.

અમુક કહેવાતા ગૌસેવકો મોઢુ મચકોડી ને કદાચ એ સ્ટોલ આગળ થી પસાર થઈ શકે છે પણ જે લોકો ને સાચે જ ગાય ની પડી છે એ લોકો માટે આ એક વિચારવા માટે નો તણખો પુરો પાડે એવુ પ્રદર્શન નટુ ભાઈ અને એમની ટીમ દ્વારા કરવામા આવેલુ હતુ. 




August 26, 2017

In Photos : डेरा भक्तो का आतंक और सरकार की नाकामी

By News Desk ॥ 26 Aug 2017

एक बलात्कारी बाबा के समर्थकाे ने 5 राज्य के तंत्र को हिला कर रख दिया क्या फर्क रह गया तालिबान,हिजबुल,IS के आतंकवादीयो में और डेरा के भक्तो में.

















August 08, 2017

साथी अरविंद खुमाण और उनकी टीम का नेक काम : 4 साल कि बच्ची पर हिंसा करने वालो पर कार्रवाई

By BlueDiary News Desk || 08 Aug 2017 || 15:03

(Image Times of India 08/08/2017)
कल रक्षाबंधन मे मौके पर हि एक दील जंजोड देने वाले घटना सामने आई है. एक चार साल की बच्ची को बुरी तरह जख्मी हालत मे पाया गया. हिंसा से जुडा ये मामला लग रहा है. हिंसा करने वाले इतने भी क्रुर कैसे हो सकते है की एक नन्ही बच्ची पर इस तरह से जुल्म ढाये. 
एक चार वर्षीय लड़की, जिसे कई दिनों तक  बेरहमी से मारा-पीटा गया था, उसे अमरेली जिले के चांच गांव से बचा लिया गया और सोमवार को राजुला शहर में अस्पताल में भर्ती कराया गया. ये पुरे मामले पर मदद करने वाले अरविंद खुमाण जो कि एक सामाजीक कार्यकर है और गरीबो को कानुनी मदद और अन्य सहायता करते है, उन्हो ने कहा कि ये बच्ची अपनी मां के साथ राजुला रेल्वे स्टेशन के पास रह रही थी. ये लोग कोळी समाज से है. लगभग एक महीने पहले एक स्थानीय व्यक्ति ने उस छोटी बच्ची को चांच गांव में रहने वाले किसी परिवार के पास भेजने को कहा था जो उन्हे शिक्षीत करेगे ऐसा कहा गया था. हालांकि, इस लड़की को वहां अच्छे से नही रखा गया एवं बुरी तरह से मारा-पीटा जाता था.

चांच गांव के कुछ लोगों ने बच्ची के मामा को बताया कि उस बच्ची को ठीक से नही रखा जाता और यातनाए दी जाती है. ये बात जानकर बच्ची के मामा लड़की की को साथ लेकर उसे वापीस लाने के लीये गये. बडी जद्दोजहद के बाद लडकी को किसी तरह से वहा से लाया गया और राजुला अस्पताल मे भर्ती कराया गया. बच्ची बहोत बुरी तरह से जख्मी थी. अरविंद खुमाण और किशोर भाई को इस मामले कि जानकारी मिलते हि वह राजुला अस्पताल के लीये रवाना हुए. बच्ची के घाव काफी गहरे थे उसके शरीर बहोत सी जगहो पर और पर उसकी उंगलियों बीच एक चाकू जैसी नुकिली चीज के साथ भी देखे गये है. निचे दी गई तसवीर मे आप देख सकते है.

अरविंद भाई ने ये भी आशंका जताई है की लडकी को वहा पर बेचा गया हो सकता है. क्योकी जब उसे लेने के लीये बच्ची के मामा और उसकी मां चांच गांव मे गये तो वहा पर सामने वालो ने ऐसा दावा कीया की लडकी को पैसे देकर खरीदा गया है. ये बहोत हि गंभीर मामला है. 

पुलिस के उप अधीक्षक राजेश परमार ने बताया कि इस मामले में शिकायत दर्ज की गई है और POCSO एक्ट के तहत इस मे आगे कि कार्यवाही होगी. पुलीस ने  बच्ची को जहा पर रखा गया था उस घर के मालिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कि है. पुलीस का कहना है कि आगे जांच के बाद ही हकीकत सामने आयेगी.

आप को बता दे कि इस पुरे मामले मे मिडिया का बहोत हि अच्छा प्रतीसाद रहा है और अरविंद खुमाण, किशोर भाइ धाखडा और उनके साथीओ ने इस मे पुरी तरह से सहायता कि और आगे भी इस मे बच्ची को न्याय दीलाने मे साथ खडे रहेगे. अरविंद खुमाण का आदर्श बाबा साहब डॉ आंबेडकर है वो अपने आदर्श बाबा साहब का सामाजीक न्याय का सिद्धांत आगे बढाने मे एक महत्वपुर्ण योगदान दे रहे है. उन्होने ये पुरी घटना अपने फेसबुक एकाउंट के जरीये लोगो के सामने रखा. इस खबर के अंत मे उनके फेसबुक पोस्ट का लींक दीया गया है आप उन्हे इस सराहनीय कार्य के लीये अपने प्रतीभाव दे सकते है. 








August 03, 2017

ये आंबेडकर है, गांधी मत समजो

By Vishal Sonara || 03 Aug 2017 at 22:40



दिल्ली में रेलवे स्टेशन पर अंत्योदय नामक ग्रुप द्वारा लगाये गये पोस्टर पर चंद घंटो मे ही पुरे देश के आंबेडकर वादीओ का गुस्सा तुट पडा. उस पोस्टर का स्लोगन कुछ इस प्रकार से था "आपके अंदर के बाबा साहेब को आप जागृत करें, गंदगी के खिलाफ इस महान अभियान में अपना योगदान दें" और उस मे डॉ आंबेडकर को कुडा उठाते दीखाया गया था.
इस पोस्टर को भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के तहत जागरुकता फैलाने के लिए लगाया गया था. स्टेशन से गुजरने वाले सभी आंबेडकरवादी साथीओ ने ईस पोस्टर को वाईरल कर दीया देखते हि देखते पुरे देश मे इस पर बबाल मच गया. लोगो ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतीक्रीया देनी शुरु कर दी. लोगो ने कहा मोदी साहब वैसे तो अपनी मोडेलींग फोटो हर कही लगाते रहते है कुडा उठाना हो तब उनको क्यो याद नही करते ये लोग. 

दिल्ली के कुछ बहुजन युवाओ को इस बात का पता चलते हि उन्होने स्टेशन जाकर उग्र विरोध दर्ज कराया और बाबासाहेब को अपमानित करने वाले पोस्टर को तुरंत उतरवा दीया. साथ हि मे इस पोस्टर बनाने वाले ग्रुप के खीलाफ पुलीस कंप्लेंट भी कर दी है. पुरे देश के जागृत लोगो की मांग है कि इस घटना के जवाबदेह अधीकारी के खिलाफ कार्यवाहि हो और धमकी दी है कि आगे से डॉ. आंबेडकर का इस प्रकार का अपमान बरदाश्त नहि कीया जायेगा. 

आंबेडकर कुडा उठाने के लीए नही संविधान लीखने और इस देश का भविष्य बनाने के लीये पैदा हुए थे मगर इस पोस्टर बनाने वालो जैसी मानसीकता के कारण हि देश अभी इस हाल मे है. 

आंबेडकर को गांधी बना ने की इस साझीश को अंबेडकरवादी युवाओं ने कामीयाब ना होने दीया इस लीये उनका घन्यवाद.

अपने अंदर के आंबेडकर को जरुर जगाओ पर इस तरह कुडा उठाने के लीये नही पर हमारे देश को उपर उठाने के लीये, देश मे गरीबी , शिक्षा, जातीवाद, प्रांतवाद, कोमवाद को मीटाने के लीये जगाओ.





July 11, 2017

गुजरात मे अखबार बदलते ही अमरनाथ हमले की बस का ड्राईवर बदल जाता है

By Vishal Sonara




संदेश की ओफीशीयल साईट मे एक ही खबर के दो अलग अलग रुप देखने के बाद गुजरात की अग्रीम माने जाने वाली दुसरे अखबारो की वेबसाईट मे जाकर देखा तो अलग ही नजारा देखने को मीला.
संदेश ने अपनी एक खबर मे ड्राईवर हर्ष को और एक खबर मे सलीम दर्शाया है.

ईस तरह एक हि खबर क लीये दो अलग नाम लीखने की क्या आवश्यकता है और क्या मंशा है वेबसाईट चलाने वालो की यह तो हम नही कह सकते पर ये जरुर बात है की एडीटर श्री अपना काम ठीक से नही कर रहे.
ये दोनो लींक ये लीखा जा रहा है तब भी मौजुद है वेबसाईट पर.
संदेश की खबर ः અમરનાથ યાત્રાળુઓ પર હુમલો: ડ્રાઇવર હર્ષ દેસાઇએ વર્ણવી આતંકી હુમલાની કંપાવનારી પળ
उपर वाली खबर के 4 घंटे बाद की संदेश की खबर ः આતંકવાદી હુમલામાં બસ ડ્રાઇવર સલીમની બહાદૂરીથી બચી અનેક જિંદગીઓ


गुजरात समाचार की साईट मे ड्राईवर का नाम सलीम मीर्जा दीखाया गया है.
सलीम मीर्जा और सलीम शेख दो अलग नाम है या एक ही ये तो हमे पता नही है ड्राईवर का नाम तो सलीम है ये तसल्ली के साथ हम गुजरात समाचार को धन्यवाद देते है.
गुजरात समाचार की खबर ः અમરનાથ એટેકઃ ડ્રાઈવરની હિંમતે બચી ગયા શ્રધ્ધાળુ, નહીતો કોઈ ન બચત

दिव्यभास्कर की साईट मे अमरनाथ बस का ड्राईवर हर्ष देसाई है वो सब से अलग मालुम होते है.
बीबीसी न्युज की खबर के अनुसार हर्ष बस का मालीक था और सलीम ड्राईवर पर यहा पे दिव्यभास्कर के तंत्री महोदय को अपने स्टाफ के कुछ ज्यादा ही भरोसा मालुम पडता है उन्हो ने खबर की सत्यता की परवाह कीये बीना एक पोस्टर तक बना डाला और अपनी खबर के साथ जोड दीया.
दिव्य भास्कर की खबर ः હર્ષે 25 આતંકીના ઘેરામાંથી બસ કાઢી, બે ગોળી વાગી છતાં 45ના જીવ બચાવ્યા

नवगुजरात समय की साईट मे ड्राईवर का नाम सलीम भाइ लीखा गया है जो काफी कुछ सोर्स के साथ मेल खा रहा है.

हांलाकी यहा पर टाईपींग मीस्टेक देखा जा सकती है पर ये बात कोइ माईने नही रखते खबर सच्ची होनी चाहीये.
नवगुजरात समय की खबर ः અમરનાથ અટેક: ડ્રાઈવરે હિંમત ન બતાવી હોત તો કોઈ ન બચ્યું હોત.

गुजरात के एक और अखबार फुलछाब की साईट पर तो अमरनाथ के सबंध मे एक भी खबर नही है.
ये हालात है गुजरात मे लोकशाही के चौथे स्तंभ का.
आज के हालात मे देश मे सांप्रदायीकता का जोर है उस मे ये बात बहोत मायने रखती है की एक मुसलमान ने अमरनाथ यात्रीयो की जान बचाई पर कुछ लोग ये नही होने देना चाह रहे. जीनको आदत बन चुकी है मसाला न्युज बनाने की वो कुछ भी कर सकते है.
हर को अपने से न्युस बना रहा है, हैरान करने वाली बात तो ये है की ये सब गुजरात मे मेईन स्ट्रीम मीडिया गीने जा रहे है. संदेश ने तो हद ही कर दी दोनो तरफ की बाते छाप दी. सब का चहीता बन ने की होड हो जैसे. गुजरात समाचार , नवगुजरात समय की बाते मेल खा रही है सरनेम को छोड दे तो वो लगभग एक समान ही है. दिव्य भास्कर की बात ये दोनो से एक दम अलग है. और संदेश दोनो तरफ है. 
हर तरफ से हो रही मुस्लीम ड्राईवर की तारीफ कुछ नफरत के पुजारीओ को पसंद न आ रही हो और वह सोशल मीडिय मे ऐसी बाते फैलाते है वह हम देखते है पर अगर मेईन स्ट्रीम मीडिया गीने जाने वाली समाचार एजंसीया इस तरह की हरकतो पर उतर आये तो क्या कहे ईस देश के मीडिया का.

( अगर इस तरह की कोइ बात आप के ध्यान मे आये तो बेजीजक आप अपनी बात हम तक पहुंचाये. )

Read : - गुजराती न्युजपेपर "संदेश" की साईट के दो संदेश

May 24, 2017

योगीराज में प्रशासन भयमुक्त के जगह भययुक्त होता जा रहा है

सहारनपुर। कल 23 मई को बीएसपी सुप्रीमो मायावती जी ने सहारनपुर का दौरा किया । मायावती जी शब्बीरपुर गांव के पीड़ितों से मिलने पहुंची थी।  जातिवादी नफरत से भरे लोगों ने कुछ अलग ही सोच रखा था । 
मायावती जी के लौटने के तुरंत बाद जब आसपास के गांवों से सभा में शामिल होने आए लोग जब वापिस जाने लगे तो रास्ते में उनपर ठाकुरों ने बंदूक, तलवार और कुल्हाड़ियों से हमला बोल दिया। इसके अलावा एक शख्स को गोली मार दी।  गांव के बाहर खेत में घंटों से घात लगाकर बैठे जातिवादी आतंकवादियों ने शब्बीरपुर के महज 500-600 मीटर की दूरी पर ही हमला बोल दिया ।


हमले में दर्जनों लोग घायल हुए जबकि 2 लोगों की मौत हो गई। तलवार बाजी में घायल दो दलितों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। तलवारों और दूसरे हथियारों से लोगों के हाथ पैर पर इस तरह से प्रहार किए गए थे कि देखने वालों का दिल रो पड़े, हमले में गंभीर रूप से घायल लोगों को मेरठ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 7 घायलों को सहारनपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लोगों का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में लोगों पर हमला हुआ।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जिस तरह योजनाबद्ध तरीके से हमलावरों ने गाड़ी को निशाना बनाया और भाग गए उससे साफ है कि वे पूरी तैयारी से थे। हमलावरों को मालूम था कि गाड़ियों का काफिला एक बार शुरू हुआ तो फिर वे अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएंगे। 
शाम करीब चार बजे मायावती शब्बीरपुर में सभा कर सरसावा एयरबेस के लिए रवाना हुईं। बड़गांब चौराहे से उनका काफिला सीधे निकल गया, जबकि कुछ लोग सहारनपुर के लिए मल्लीरोड निकले। इसी समय खेतों से निकलकर आए हमलावरों ने हमला कर दिया। 

मायावती के निकलने और हमला होने मे महज चंद मिनटों का फांसला रहा..!!!
प्रशासन की नाकामी साफ तौर पर देखी जा सकती है... 

सहारनपुर में एक महीने के अंदर ये तीसरा मामला है। पहला मामला 20 अप्रैल का है जब बाबासाहेब की जयंती को लेकर मुसलमानों और दलितों के बीच विवाद कराने की कोशिश की गई थी। उसके बाद दूसरी घटना सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में 5 मई हुई। जिसमें राजपूत समुदाय के लोगों ने दलितों के सैकड़ों घरों में लूटपाट की और 50 से ज्यादा घरों को आग के हवाले कर दिया। 

ठाकुरों का आरोप है कि मायावती के आने से पहले दलितों ने उनके घर पर पथराव व आगजनी की थी। जबकि दलित समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि बीएसपी सुप्रीमो मायावती के आने की वजह से ठाकुर चिढ़े हुए थे, जिसकी वजह से उन्होंने हम पर हमला बोला है।

आला अफसरों ने ठाकुरों की बस्ती को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। आसपास के जनपदों से भी पुलिस बल को बुलाया गया है। मेरठ से एडीजी आनंद कुमार शब्बीरपुर के लिए रवाना हो गए हैं। साथ ही गांव में मुजफ्फरनगर व शामली से फायर ब्रिगेड की गाड़ी व पीएसी बुलाई जा रही है।
जो बंदोबस्त निर्दोष लोगों के लिए होना चाहिए था वह लोगों के मरने के बाद दिया जा रहा है ।

मंगलवार को दलितों पर तलवारों से हुए हमले के बाद अब ओबीसी समुदाय के लोगों पर भी हमला किया गया है। सहारनपुर के नानौता बड़गांव मांर्ग पर ओबीसी समाज के दो लोगों पर हमला किया गया है। यहां एक आदमी को गोली भी मारी गई है।

बताया जा रहा है कि प्रजापति समाज के दो लोगों पर तब हमला किया गया जब वह सहारनपुर के नानोता बड़गांव मार्ग पर रात तीन बजे भट्टे पर जा रहे थे। इस दौरान एक शख्स को गोली मार दी गई। दोनों लोगों को जिला चिकित्सालय भेजा गया है।

क्या पूरे देश में गोधरा, सहारनपुर, मुज्जफरनगर, झारखंड, कश्मीर जैसे हालात बनने जा रहे हैं??? 
सहारनपुर (यूपी) की आग देशभर में फैल सकती है. इसके मुख्य कसूरवार सरकारी उदासीनता ही नहीं विध्वंसकारी नीति भी है...

हमारी मनुमीडिया के मुताबिक सहारनपुर हिंसा के लिए मायावती और भीम आर्मी जिम्मेदार। क्या उसकी जिम्मेदारी बिलकुल नहीं जो कानून व्यवस्था संभालनेमें नाकामयाब है?
ये सब घटना क्रम इस बात का सबूत है कि राष्ट्रवादीयों का राष्ट्रवाद और कुछ नहीं शोषित पीडित तबकों का दमन ही है ।

(Created by : ब्लु डायरी ब्यूरो)