May 27, 2018

Marginalisation of Muslims in Gujarat

By Raju Solanki  || 18 April 2018 


Before 2017 assembly elections there were 42 Patel MLAs. Both BJP and Congress danced around Patel community and hardik patel called the shots. Guided by their sheer lust of political power both Alpesh and Mevani succumbed to Congress agenda and ultimately they all contributed to the political marginalisation of Muslims in Gujarat. And now Patels have 47 MLAs and Muslims have only three though they are numerically at par with patels.

राजस्थान में दलित एट्रोसीटी और कांग्रेस पार्टी

By Raju Solanki  || 15 April 2018 


राजस्थान में हिन्दुत्व की हिंस्रता सत्ता के समर्थन से दलितों को रौंद रही है. यहां तीन तसवीरें मैंने रखी है. पहली तसवीर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पथ संचलन के कार्यक्रम की है, जो 14 अप्रैल के दिन सरेरी खंड के मोड का निम्बाहेडा गांव में हुआ था. दुसरी तसवीर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की भीलवाडा में भगवा रैली के कार्यक्रम की है. यह दोनों तसवीरें स्पष्ट रूप से यह दिखाती है कि राजस्थान में दलित-विद्रोह को वैचारिक तौर से परास्त करने के लिए संघ परिवार पूरी तरह से जोर लगा रहा है. तीसरी तसवीर जिला नागौर के मेडता शहर के पुलीस थाने के थानाधिकारी (पोलीस इन्सपेक्टर) का पत्र है, जो उसने मेडता सिटी ब्लोक के ब्लोक प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (डीपीईओ) को भेजा है, जिसमें उसने लिखा है कि दिनांक 2-4-2018 को उनके ब्लोक के अधीन वाले तमाम कार्यालयों तथा स्कुलों में कार्यरत तमाम कर्मचारी एवम अधिकारियों के नाम उनके मोबाइल नंबर के साथे भेजें, जो लोग उस दिन अवकाश पर अर्थात् लीव पर रहे हो.

राजस्थान में वसुंधरा राजे की सरकार दलितों को कुचलने के लिए तमाम प्रकार के हथकंडे अपना रही है. अभी अहमदाबाद के होप अस्पताल में रानीवाडा से एक दलित युवा को लाया गया था, जिसको मस्तक में टीयरगेस का शेल लगा था और वह गंभीर रूप से जख्मी हुआ था. सूना है कि रानीवाडा में दलितों पर पुलीस तथा करनीसेना ने भयानक हमला किया और दलितों को काफी नुकसान पहुंचाया है.

हम गुजरात के दलित राजस्थान के साथियों के साथ खडे हैं. मगर सवाल यह है कि आनेवाले दिनों में राजस्थान के चुनावी समर में बीजेपी को चुनौती देनेवाली कांग्रेस पार्टी क्या कर रही है? राजस्थान के दलितों को कानूनी मदद के लिए कांग्रेस पक्ष की और से कोई लीगल सेल है कि नहीं? यही सवाल बीएसपी के लिए भी हम पूछ सकते हैं. क्या हमें राजस्थान के दलितों पर हो रहे अत्याचारों का कोई प्रमाणित ब्यौरा मील सकता है?

May 10, 2018

अमेरिका की एक ओर युनीवर्सीटी मे आंबेडकर की कांस्य प्रतिमा का अनावरण

By Vishal Sonara || 10 May 2018


युनाइटेड स्टेट्स ओफ अमेरिका की University of Massachusetts, Amherst में सामाजिक न्याय के महानायक डॉ भीमराव आंबेडकर की कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया. अमेरिका में आंबेडकर के समानता वादी विचारों का प्रभाव तेजी से बढ़ता जा रहा है और काफी लोग अब उनकी सोच से जुड रहे हैं.
इस मौके पर यूनिवर्सिटी के डेप्युटी चांसलर और चीफ प्लानिंग ओफिसर स्टीव गुडवीन ने कहा कि डॉ आंबेडकर और अमेरिकन सिविल राईट्स मूवमेंट के आंदोलनकारि डॉ विलियम एडवर्ड बुघार्ट (Dr. W.E.B.Du Bois) के जीवन और कार्यो मे काफी समानता थी. आगे कहते हुए उन्होंने कहा, "डॉ आंबेडकर लोकतंत्र और हर एक मनुष्य के लिए समान सामाजिक अधिकारों के लिए वो एक प्रेरणा स्तोत्र है. आंबेडकर और उन के विचार आज भी प्रासंगिक है. शिक्षा का सही मूल्य क्या होता है वो हम भीमराव आंबेडकर के जीवन और उनके दबे कुचले लोगों के लिए किए गए कार्यों से समझ सकते हैं. "

आज भारत के लोग बाबासाहेब के विचारों को समझे या ना समझे पर पुरी दुनिया को बाबासाहेब प्रेरणा देते रहेंगे.
- विशाल सोनारा
Reference :-
Dr. Ambedkar’s bust unveiled at University of Massachusetts-Amherst - India New England news. 


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May 07, 2018

What is the difference between ‘victim’ and ‘agitationist’?

By Raju Solanki  || 07 May 2018 at 8:16am


What is the difference between ‘victim’ and ‘agitationist’?

When you evaluate religious conversion of Dalit victims of Una, remember following points:

The perspectives of ‘victim’ and ‘agitationist’ are different.
‘Victim’ wants the permanent solution of his problems.
‘Agitationist’ has come out to make his political career by exploiting the pain of ‘victim’.

‘Victim’ converts to Buddhism because he does not want to remain Hindu.
For ‘agitationist’ conversion is a ‘personal problem’, hence problem of ‘victim’. It is not ‘agitationist’ problem.

‘Victim’ opposes both Congress and BJP because he knows that system never changes whoever rules.
If ‘agitationist’ opposes both Congress and BJP, he can't make his political career, so he opposes only one party and goes on flirting with his so-called agitations.


In Gujarati :-

પીડિત અને આંદોલનકારી વચ્ચેનો ફરક સમજો

ઉનામાં ગૌરક્ષકોના દમનનો ભોગ બનેલા દલિતોના બૌદ્ધ ધર્મ પરિવર્તનનું મૂલ્યાંકન કરતી વખતે આપણે આટલી બાબતો ધ્યાનમાં રાખીએ,

પીડિત અને આંદોલનકારીના દ્રષ્ટિકોણો અલગ અલગ છે.
પીડિત સમસ્યાઓનું કાયમી નિરાકરણ ઇચ્છે છે.
આંદોલનકારી પીડિતની પીડા વટાવીને પોતાની રાજકીય કારકીર્દિ બનાવવા નીકળ્યો છે.

પીડિત બૌદ્ધ ધર્મ પરિવર્તન કરે છે, કેમ કે તે ‘હિન્દુ’ રહેવા માંગતો નથી.
આંદોલનકારી માટે ધર્મ પરિવર્તન ‘વ્યક્તિગત સમસ્યા’ છે, એટલે કે પીડિતની સમસ્યા છે, આંદોનકારીની સમસ્યા નથી.

પીડિત કોંગ્રેસ અને ભાજપ બંનેનો વિરોધી છે, કેમ કે તેને ખબર છે કે કોઈપણ પક્ષનું શાસન હોય, વ્યવસ્થા બદલાતી નથી.
આંદોલનકારી કોંગ્રેસ અને ભાજપ બંનેનો એકસાથે વિરોધ કરવા જાય તો તેની રાજકીય કારકીર્દિ બનતી નથી, એટલે તે કોઈ એકનો વિરોધ કરે છે અને કહેવાતા આંદોલનો કર્યા કરે છે. આંદોલનકારીને વ્યવસ્થા બદલવામાં લગીરે રસ નથી.

May 06, 2018

बीलेटेड हैप्पी बर्थ डे डियर कार्ल मार्क्स

By Vishal Sonara || 6 May 2018



आज से 200 साल पहले (5 May 1818) जर्मनी में जन्मे कार्ल मार्क्स बहोत बडे विचारक माने जाते हैं. उनके इसी बडे बडे विचारों के कारण 1849 को उन्हें जर्मनी से निकाल बहार किया गया, बाद में वो पेरिस चले गए. पेरिस से भी बहोत कम समय में 1849 में ही निष्कासित कर दिया गया था. बाद मे बाकी की जिंदगी उन्होंने लंदन में निर्वासित के स्वरूप में व्यतीत की. उनकी मृत्यु 14 March 1883 मे लंदन में हुई थी. 
उनके द्वारा दि गई विचारधारा को मार्क्सवाद कहा जाता है. जो बहोत मस्त विचारधारा है पर फिल्मी भाषा में कहें तो "A" सर्टिफिकेट से कम नहीं दे पाएंगे हम. क्योंकि इस विचारधारा में हिंसा और नरसंहार के दृश्य बहोत देखने को मिलते हैं. 
कार्ल मार्क्स ने लिखने मे कोई कसर नहीं छोड़ी और उनके अनुयायियों ने लोगों को निपटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. 
अब तक लाखो करोड़ों तथाकथित 
पूंजीपति और मार्क्सवाद के विरोधी लोगों को कॉमरेड्स ने तडपा तडपा कर मार डाला है और कार्ल मार्क्स की कृपा रही तो आगे भी ये सिलसिला जारी रहेगा. 
कार्ल मार्क्स का कहना था कि,
"The last capitalist we hang shall be the one who sold us the rope." 

मतलब की,
"आखरी पूंजीपति जिसे हम रस्सी से फांसी पर लटकाएंगे वह वो होगा जिसने खुद हमें वो रस्सी बेची होगी." 

मतलब की पैसेवालों को तो बस मार ही दो, जिंदा रहेंगे तो शोषण करेंगे ना?? 
आतंक को अगर छोड दें तो बंदा बाकी की ज्यादातर बातों में बहोत सही था, पर क्या करे उनके अनुयायियों ने "लाल" कलर को दिल पर ले लिया और पुरी दुनिया को तथाकथित पूंजीवादीयों के खुन से रंगने का काम शुरू कर दिया. 
मे कार्ल मार्क्स के चाहको को शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि हमारे देश में भी कभी मार्कवाद का शासन आए और कार्ल मार्क्स की लोगों को मारने की विचारधारा पर जोर न देते हुए बाकी के उपदेशों को सही से लागू करने का प्रयास करें. और अगर मारना शुरू भी कर दें तो मुझे माफ कर देना, मैने तो मजाक मजाक में ये ये सब लीखा है.  
- विशाल सोनारा

Note : यहां दि गई फोटोस आप को विचलित कर सकती है (दुनिया के इतिहास को भी विचलित कर दिया था) , इसलिए समझदारी से देखें. 18 साल से कम उम्र के लोग ना देखें.


- Vynnytsa, Ukraine, June 1943. Mass graves dating from 1937–38 opened up and hundreds of bodies exhumed for identification by family members.



- The corpses of victims of Soviet NKVD murdered in last days of June 1941, just after outbreak of German-Soviet War (NKVD prisoner massacres) and escape of Red Army and NKVD troops from the cities. Here: Lwów, citizens of Lwów are looking for their friends and relatives, previously arrested by NKVD and kept in prison.



- Plaque memorizing members of Estonian government who were killed by Communist terror. Location: residence of Government of Estonia (a.k.a. "The Stenbock House"), Toompea,Tallinn, Estonia. Date: May 2006.



- Skulls of victims of the Khmer Rouge regime in Cambodia.


- Infants were fatally smashed against the Chankiri Tree (Killing Tree) at Choeung Ek, Cambodia.


-Katyn 1943 exhumation. Photo by International Red Cross delegation.
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